Monday, May 11, 2026

स्वयं को दूसरों की नजरों से देखना बंद करें

 स्वयं को दूसरों की नजरों से देखना बंद करें 

आज युवाओं में शरीर को जीरो साइज का बनाने के लिए दवाएं लेने का प्रचलन बढ़ा है। मूझे लगता है यह प्रवृति आत्मघाती है। दवाइयों से शरीर हो सकता है तात्कालिक रूप से पतला हो जाये किन्तु उसके जो साइड इफ़ेक्ट होंगे वह अंततः शरीर को नुकसान ही पहुंचाएंगे।

       मेरा मानना है कि हमें अपने शरीर से प्यार करना सीखना होगा। हमारे शरीर की बनावट खान-पान के साथ व्यक्ति के जीन (आनुवंशिकी) पर भी निर्भर है।  अगर इंसान अपने शारीरिक  विसंगतियों पर विचलित होने की अपेक्षा आंतरिक गुणों के विकास में ध्यान देगा तो जो जैसा है, उसी में स्वीकार्य होगा। 

         यह अवश्य है कि सांचे में ढला शरीर आत्मविश्वास को बढ़ाता है किन्तु इंसान को अपनी फिटनेस बढ़ाने के लिए प्राकृतिक साधनों को अपनाना चाहिए न कि दवाओं का। 

           जिंदगी आपकी अपनी है फिर दूसरों की नजरों से स्वयं को देखना बंद कीजिये। जीवन आपका अपना है, अपनी तरह से जिएं तभी आप जिंदगी का आनंद ले पाएंगे।


Friday, May 8, 2026

जनादेश का अनादर करती ममता दी...

 ममता जी जब कहती हैं कि मैं इस्तीफा नहीं दूँगी तो न जाने क्यों मुझे रानी झाँसी की याद आ गई। उन्होंने भी कहा था कि मैं अपनी झाँसी नहीं दूँगी।


मुझे अपनी इस सोच पर ग्लानि भी होती है क्योंकि  दोनों में जरा सा भी साम्य नहीं है। रानी झाँसी एक राज्य की रानी थीं जबकि ममता बनर्जी एक लोकतान्त्रिक देश के एक लोकतान्त्रिक राज्य की चुनी हुई प्रतिनिधि। जिस जनता ने उन्हें शासन सौंपा, उसी ने उन्हें सत्ताचयुत भी कर दिया। फिर भी जनता की इच्छा का सम्मान न करना अपनी जिद पर अड़े रहना क्या भारतीय संविधान की अवहेलना नहीं है?


इसके अतिरिक्त वह इंटरनेशनल कोर्ट में जाने की बात कर रही हैं। क्या वह यह नहीं समझ रही हैं कि पश्चिमी बंगाल भारत का हिस्सा है? शायद वह पश्चिमी बंगाल को स्वतंत्र राष्ट्र समझने लगी थीं। इस बार अगर जनता ने उनके मंसूबों पर लगाम नहीं लगाती तो शायद वह अपने मंसूबो में सफल भी हो जातीं। बांग्लादेश के मंत्रियों के बयानों से यह साबित हो भी रहा है।


किन्तु इससे भी आश्चर्य तो इंडी गठबंधन के लोगों की प्रतिक्रिया देखकर हो रहा है जो मोदी विरोध में इतने अंधे हो चुके हैं कि वे ममता के इस संविधान विरोधी रवैये का समर्थन कर उनकी सोच को हवा दे रहे हैं। ऐसे लोग भारतीय जनता को मूर्ख समझते हैं जबकि वे नहीं जानते जनता बेहद परिपक्व है वह जिसे चाहती है दिल खोलकर चाहती है जब नाराज होती है तो ऐसे बदला लेती है कि उसकी लाठी में आवाज़ नहीं होती।


Wednesday, December 3, 2025

धर्म ध्वजा

 धर्म ध्वजा लहराई है 

पुनर्नजागरण की सुबह आई है

उठो, खोलो आँखें, सहेजो विरासत  

संदेसा बस इतना लाई है।


गर्व करो भाषा पर 

पहचानो अपनी संस्कृति 

जिन्दा कौम हो, छोड़ो अचेतनता

संदेसा बस इतना लाई है।


अपनी स्थिति के नियंता तुम 

चैतन्य हो, आगे बढ़ो  

बदलना है, गर जीवन का गान

संदेसा बस इतना लाई है।


प्रेम और सद्भाव जीवन का मूलमंत्र 

वसुधैव कुटुंबकम उद्घोष हमारा  

घृणा, द्वेष का करो परित्याग

संदेसा बस इतना लाई है।


ईश्वर एक धर्म अनेक

सर्व धर्म सम्भाव हो जीवन दर्शन  

अनेकता में एकता हो समग्र चेतना।

संदेसा बस इतना लाई है।


धर्म ध्वजा लहराई है 

पुर्नजागरण की सुबह आई है

पुर्नजागरण की सुबह आई है।

©सुधा आदेश 


Tuesday, September 9, 2025

Gen z

 Gen Z द्वारा नेपाल में जारी आंदोलन क्या उनकी बेरोजगारी, भ्रष्टाचार दूर कर पायेगा? क्या यह पीढ़ी इतनी संवेदनहीन और उच्चश्रृंखल हो गईं है कि उसे अपने ही देश के लोगों को मारने, अपने देश के बैंको को लूटने, देश की संपत्ति जलाने में जरा भी संकोच नहीं होता?


ऐसे लोग यह क्यों भूल जाते हैं कि देश के विकास में देश के हर नागरिक का योगदान होता है। ये लोग देश को अराजकता में झोंककर स्वयं का ही नुकसान करेंगे। मत भूलिए देश बनाने में सदियाँ लग जाती हैं जबकि मिटाने में पल भर भी नहीं लगता।


आश्चर्य तो भारत के उन चंद नफरती गैंग के नेताओं पर भी होता है जो भारत में भी ऐसे ही हालातों की कल्पना कर रहे हैं।

😔😔

Tuesday, August 19, 2025

एक विचार

 

अगर आप अपने विचार किसी को तर्कसम्मत तरीके से नहीं समझा सकते तो अपशब्दों के द्वारा अपने कुंठित विचारों को प्रकट कर उत्तेजना उत्पन्न कर स्वयं को सही सिद्ध करने का प्रयास करने लगते हैं।

यही राहुल गाँधी और उनकी टीम के साथ हो रहा है। वह ठोस मुद्दे उठाने या अपने संगठन में कमजोरी ढूंढने की बजाय कभी चौकीदार चोर है कहते हैं तो कभी EVM को दोषी ठहराते हैं। एक तरफ SIR का विरोध तथा दूसरी फर्जी वोटर लिस्ट का राग। अब ‘वोट चोर गद्दी छोड़ो’ का नारा। 

आखिर कांग्रेस को मतदाताओं का तिरस्कार करने तथा धमकाने का अधिकार किसने दिया? 

यह तो वही बात तुम मुझको न चाहो तो कोई बात नहीं, किसी दूसरे को चाहोगी तो मुश्किल होगी।



Sunday, June 22, 2025

लंच के बहाने

प्रधानमंत्री शाहनवाज खान को दरकिनार कर असिम मुनीर को लंच पर बुलाकर उसको पुचकारना सोची समझी साजिश है बड़बोले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की... उनसे नोबल प्राइज के लिए नोमीनेट करवा कर,मुनीर के गले में पट्टा बाँधने के साथ कहीं  ट्रम्प G7 की मीटिंग छोड़कर इसीलिए तो नहीं आये थे कि वह मोदी जी को भी वहां बुलवा कर ऑपरेशन सिंदूर में मध्यस्थता की अपनी बात को सत्य सिद्ध कर सकें किन्तु मोदी जी के मना करने पर यह संभव नहीं हो पाया वरना उनका मोदीजी को फोन करना, उन्हें बुलाना बेमकसद तो नहीं हो सकता।


अमेरिका ने स्वयंभू बनने के चक्कर में उक्रेन को रूस से युद्ध के लिए तो उकसाया ही, अब इजराइल और ईरान के बीच युद्ध को हवा दे रहा है।

आज तो उसने ईरान के एटॉमिक बेस पर हमला करने का दावा भी किया है।


न जाने क्यों पिछले कुछ दिनों से कवि प्रदीप जी का लिखा गीत मेरे मन मस्तिष्क में गूंज रहा है…


एटम बमों के जोर पर ऐंठी है ये दुनिया, बारूद के ढेर पर बैठी है ये दुनिया…


काश! नीति नियंता सामान्य लोगों के बारे में भी सोचते क्योंकि मरते और सहते तो वही हैं। 



Friday, June 13, 2025

स्त्री तुम...

 मेरी डायरी का एक पृष्ठ...


स्त्री तुम…


स्त्री तुम सशक्त बनो प

र इतनी भी नहीं 

कि भूल जाओ 

अपनी संवेदनशीलता

मर्यादा, कर्तव्य

सहनशीलता, विनम्रता

रिश्तों को गूंथने की 

देवीय कला।


तुम सशक्त बनो

मन से तन से 

बनो पिता की शक्ति 

माँ जैसी त्यागिनी

जल, थल, वायु को 

मुट्ठी में बंद करने की कला

देश की प्रगति का 

आधार बनो…


स्त्री तुम सीखो 

जुडो, कराटे, बॉक्सिंग 

पुरुषों के कदम से कदम 

मिलाकर चलने की योग्यता 

प्रतिस्पर्धा करो 

स्वस्थ स्पर्धा 

पर मत सीखना 

अपना ही सिंदूर 

उड़ाने की कला…


सुधा आदेश 

बंगलुरु