Tuesday, June 2, 2026

कौमें मिटती नहीं

 कौमें मिटती नहीं 


खून तुमने भी बहाया 

हमने भी बहाया

मिली आजादी 

जश्न दोनों ने मनाया 

दो टुकड़े में बंटा देश 

गम नहीं था फिर भी 

रहेंगे भाई-भाई की तरह 

था मन में सकून।


न जाने कब तुम 

मानव से बन गये दानव 

खून चूसते रहे तुम 

निर्दोषों का 

सहन करते रहे हम 

देते रहे बार -बार 

सुधरने का अवसर 

तुम न सुधरे 

बढ़ता गया 

तुम्हारा जूनून।


धर्म और राजनीति के नाम पर 

चलाओगे कितनी गोलियां 

मत भूलो 

नाम अलग हैं तो क्या 

रंग तो एक ही है खून का

मत फैलाओ 

इतना उन्माद 

साँसो को भी 

नसीब न हो चैन।


तुम हमें नहीं जानते,

न हम तुम्हें 

हम कभी मिले भी नहीं 

फिर मन में यह कटुता, 

विषाक्तता कैसी…

इंसान तुम भी हो 

इंसान हम भी हैं 

फिर ये नफरतों के 

कैसे अरण्य!!


मत भूलो कौमें मिटती नहीं 

मिट जाते हैं मिटाने वाले 

अभी भी न समझे

सदियों पुरानी बात 

न तुम रहोगे न देश तुम्हारा

कोरी धमकी नहीं, है संकल्प 

गर सहिष्णुता का 

न कर पाये सम्मान।


अभी तो झांकी ही देखी है

चाहते हो निज देश की सलामती

छोड़ दो फ़िरक़ा परस्ती

देखो कितनी हसीन है दुनिया 

चैन से तुम रहो 

चैन से हम रहें

सर्वधर्म सम्भाव का 

अपना कर मंत्र।


कोई धर्म नहीं सिखाता 

ईर्ष्या, बैर भाव 

छोड़ कर नफरतें 

चलो करें 

विश्व बंधुत्व की बात 

एकता की पेश करें 

एक ऐसी मिसाल

जिसके लिए हुए कुर्बान 

हमारे वीर जवान।

सुधा आदेश