स्वयं को दूसरों की नजरों से देखना बंद करें
आज युवाओं में शरीर को जीरो साइज का बनाने के लिए दवाएं लेने का प्रचलन बढ़ा है। मूझे लगता है यह प्रवृति आत्मघाती है। दवाइयों से शरीर हो सकता है तात्कालिक रूप से पतला हो जाये किन्तु उसके जो साइड इफ़ेक्ट होंगे वह अंततः शरीर को नुकसान ही पहुंचाएंगे।
मेरा मानना है कि हमें अपने शरीर से प्यार करना सीखना होगा। हमारे शरीर की बनावट खान-पान के साथ व्यक्ति के जीन (आनुवंशिकी) पर भी निर्भर है। अगर इंसान अपने शारीरिक विसंगतियों पर विचलित होने की अपेक्षा आंतरिक गुणों के विकास में ध्यान देगा तो जो जैसा है, उसी में स्वीकार्य होगा।
यह अवश्य है कि सांचे में ढला शरीर आत्मविश्वास को बढ़ाता है किन्तु इंसान को अपनी फिटनेस बढ़ाने के लिए प्राकृतिक साधनों को अपनाना चाहिए न कि दवाओं का।
जिंदगी आपकी अपनी है फिर दूसरों की नजरों से स्वयं को देखना बंद कीजिये। जीवन आपका अपना है, अपनी तरह से जिएं तभी आप जिंदगी का आनंद ले पाएंगे।
No comments:
Post a Comment