Monday, August 29, 2011

आज मेरी माँ को गए दो वर्ष हो गए पर ऐसा लगता हे वह आज भी मेरे आस पास ही हे जब में परेशांन   होती हूँ तो वह  चुपचाप आकर मेरे सर पर हाथ रख कर मुझे दिलासा देती हे...में रोटी हूँ तो उनके हाथ मेरे   आंसू पोंछ देते हे....उनकी बड़ी-बड़ी आँखे आज भी मेरे आने का इंतजार करती हे तथा मेरे जाने की खबर सुनकर उदास हो जाती हे....आज भी वह मेरी मार्गदर्शक हे....मेरी छोटी से छोटी ख़ुशी उनके चहरे पर ख़ुशी तथा मेरा छोटे से छोटा दुःख उनके चहरे  पर उदासी ले आता हे....वह    जहाँ कही भी हो सुखी हो....उनका आशिशो भरा हाथ   हमारे सर  पर हो....यही कामना  हे....

Sunday, July 31, 2011

क्या खोया क्या पाया

जीवन की आपाधापी में क्या खोया क्या पाया जब समझ पाए तब हाथ खाली थे... अपने हो चुके थे पराये जीवन के चौराहे पर हम नितांत अकेले विस्मित खड़े थे आखिर हमारे जैसे सफल आदमी से चूक कहाँ, क्यूँ कर हुई... दिल ने झकझोरा तुम सफल थे पर जिनको सीढ़ी बनाकर तुमने सफलता के शिखर छूये, आगे बढ्ने के जुनून में उन्हें तुम स्वयं रोंदते गए तुम ने जैसा बोया वैसा ही पाया अब दुःख क्यों,अफसोस क्यों...?

Tuesday, July 5, 2011

jivan

जीवन  दो  पल  का,
उसमे सिमटती सारी व्यथाये ,
आशाये , निराशाये ,
कब और कहाँ ,
क्यों और कैसे,
प्रशन    निरर्थक ,
शेष सिर्फ यादे.    

Tuesday, June 28, 2011

krodh

क्रोध क्रोध मानव का सबसे बड़ा दुश्मन हे क्योकि क्रोध में व्यक्ति विवेकशून्य हो जाता हे....अपना मानसिक संतुलन खो देता हे जिसके कारण उसे अपने अच्छे बुरे का ख्याल ही नहीं रहता....मानव को अगर मानव बने रहना हे तो उसे अपने क्रोध पर अंकुश लगाना होगा... जो ऐसा करने में सक्षम रहता हे वह जीवन में आई हर बाधा को पर कर आगे बढ़ता जाता हे....।

Monday, June 27, 2011

shubhkamnaye

 प्यार की भीनी-भीनी सुगंध हे विवाह बंधन,
विश्वास की लडियो से गुंठित  है विवाह बंधन,
सात वचनों,सात जन्मो का साथ है विवाह बंधन,
सतरंगी इन्द्रधनुषी  अहसास है विवाह बंधन, 
आंधी तूफानो के बीच भी हाथ में पकडे हाथ
चलते जाने का नाम है विवाह बंधन.... 
सदा खुश रहो, ढेरो आशीष के साथ....
        मम्मी  एवम पापाजी ....   

Tuesday, June 21, 2011

शब्द दिल को तोड़ते भी हैं, दिलों को जोड़ते भी हैं ...

शब्द दिल को तोड़ते भी हैं, दिल को जोड़ते भी हैं । शब्दों के हेर-फेर से रिश्ते बिगड़ते भी है,संभलते भी है। शब्दों की बात निराली,रीत निराली, शब्दों को समझे बिना, शब्दों का तिलस्म न जान पाओगे बंधु। शब्दों के संग कर यारी करके देखो मित्र, अच्छे-बुरे वक्त में बहुत काम आयेंगे...।

Saturday, June 18, 2011

vishvas

विश्वास के बल पर ही पूरी दुनिया और मानव का मानव से संबंध कायम हे यह एक सार्वभोमिक सत्य हे....पर इससे भी बड़ा सत्य हे मानव का निज  पर विश्वास....अगर हमे निज  पर विश्वास नहीं हे तो हम योग्य होते भी सफल नहीं हो पायेगे, कहा भी गया हे मन के हारे हार हे मन के जीते जीत....हर  मानव  के जीवन में अच्छे बुरे पल आते हे पर अगर निज पर विश्वास हे तो मानव मार्ग में आई हर  बाधा को पार कर अपने उद्देश्य  को प्राप्त कर ही लेगा....