पेपर लीक सिर्फ भारत की नहीं वरन वैश्विक समस्या है। कुछ दिन पहले लंदन में भी पेपर लीक हुआ था। बस अंतर इतना है कि वहां आरोपियों पर तुरंत कार्यवाही हो जाती है लेकिन हमारे देश कि लचर क़ानून व्यवस्था के कारण आरोपियों को सजा नहीं मिल पाती
सच हमारा समाज नैतिक रूप से इतना गिर गया है कि उसे अपने स्वार्थ ए अतिरिक्त कुछ नजर नहीं आता। अपने हित के लिए वह अपने देश और समाज का ही अहित करने में पीछे नहीं रहता। यहाँ तो पेपर बनाने वाले ने ही पेपर लीक कर दिया।
लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी के द्वारा किया आंदोलन पेपर लीक पर कम अपने स्वार्थ के लिए अधिक था, ऐसा मुझे लगता है। जब नीट की परीक्षा दुबारा हो गई, सफल अभ्यर्थी एडमिशन लेने की तैयारी कर रहे हैं तब इस आंदोलन का क्या औचित्य? हाँ अगर ये इस बात पर आंदोलन करते कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले, जिससे यह गलती दुबारा न हो तो बात समझ में भी आती है या फिर उस न्याय व्यवस्था के विरुद्ध करते जहाँ डेट पर डेट लगती जाती हैं किन्तु न्याय नहीं मिल पाता या उन वकीलों के विरुद्ध करते जो पैसों के लिए केस को दुर्बल कर देते हैं या आतंकियों के लिए रात में भी कोर्ट खुलवा लेते हैं। इसके साथ आश्चर्यजनक बात तो यह रही कि इस मंच से देश विरोधी नारे भी लगे।
माना पेपर लीक बहुत बड़ी समस्या है लेकिन क्या सिर्फ लीक करने वाला दोषी है? क्या वे दोषी नहीं हैं जो अपने नालायक बच्चों को योग्य बनाने के लिए येन केन प्रकारेण किसी हद तक भी जा सकते हैं।
बच्चों को योग्य बनाना, उसके सुखी एवं समृद्ध जीवन की कामना हर इंसान करता है किन्तु जिसके जीवन की नींव ही झूठ और फरेब पर बनी होगी वह भविष्य में कैसा होगा उसकी कल्पना ही की जा सकती है।
मेरा मानना है कि जो लक्ष्य के प्रति समर्पित रहता है, उसे सिर्फ अपना लक्ष्य ही दिखाई देता है। इस आंदोलन का वही हिस्सा बने जिन्हें पढ़ाई से कोई मतलब नहीं है, वरना इनके मुँह से इतनी अश्लील बातें…