अन्ना हज़ारे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपना संकल्प फिर दोहराया है पर उनका यह प्रयास सदियो से चले आ रहे नासूर से मुक्ति दिला पाएगा शायद नहीं पर फिर भी उनके प्रयास की सराहना हर कोई कर रहा है आखिर कोई तो है जो समाज मे फैली इस बुराई से मुक्ति दिलाना चाहता है...और कुछ हो या न हो कम से कम जन मानस तो आंदोलित होगा अगर ऐसा होता हे तो निश्चय ही उनका मंतव्य पूरा हो जायेगा....उनकी कामना सफल हो भ्रष्टचार पर अंकुश लगे आज हर सच्चे देशवासी की यही चाह हे.....पर यह तभी संभव है जब हम अपनी एकजुटता दिखाये तथा निरंकुश होती जा रही इस सरकार को झुकने के लिए मजबूर कर दे....जय भारत....
Wednesday, April 6, 2011
Tuesday, April 5, 2011
world cup
जी हाँ पिछले कुछ दिनों से जहाँ देखो वहां बस सब क्रिकेट की ही बाते कर रहे हे....करे भी क्यों न आखिर २८ वर्ष बाद हमारी क्रिकेट टीम वर्ल्ड कप जीती हे....हम सबके लिए गर्व की बात हे....जीत का एक अलग ही नशा होता हे पर दुःख तो यह देख कर होता हे की पूरा देश ही इन पर धन बरसा रहा हे, लाखो करोडो तो ऐसे दिए जा रहे हे मानो १००o,२००० हो....इतनी ही दिलेरी hum अन्य खेलो के लिए क्यों नहीं दिखाते क्या उनके त्याग और समर्पण में कोई कमी हे....क्या उन्होंने देश का नाम रोशन नहीं किया....लाखो, karodo का दान देते समय हमारी सरकारे अपने उस नारे को भूल जाती हे....हमारा हाथ गरीबो के साथ....पर यहाँ तो यही नजर आ रहा की सरकार का हाथ गरीबो के साथ नहीं वर्ना इन क्रिकेटर के साथ हे....इनको न केवल धन दिया जा रहा हे वरन इनके टेक्स भी माफ कर दिए जाते हे....आखिर यह कैसा जूनून हे जिसने इस देश को जकड़ रक्खा हे अगर ऐसा न होता to किग्फिशेर एयरलाइन वाले उनके पुरे परिवार के लिए देश विदेश की यात्रा मुफ्त करने की घोषणा न करते....अगर यह जूनून हे तो इश्वर इन्हें सद्बुधी दे की ये प्राप्त धन को किसी चेरिटी के काम में लगाये....किसी गाव को अपना कर उसे विकास की राह पर ले जाये....या किसी गरीब के बच्चो की पढाई की जिम्मेदारी उठाये....पुरे वर्ष चलने वाले इस क्रिकेट का यह बूखार एक दिन सबको अपनी चपेट में ले लेगा....कोई नहीं बचेगा दुश्मन हमारे देश पर आक्रमण कर रहा होगा और हम जय हिंद के नारे के साथ उससे लोहा लेने की बजे चौको और ६क्कों पर तली बजाते-बजाते मौत को गले लगा रहे होंगे....
Monday, April 4, 2011
nav varsh shubh ho
आज चेत्र माह का पहला दिन हे अर्थात हिंदी कैलेंडर के अनुसार आज हमारा नववर्ष पर आज किसे याद हे....क्या हम पाश्चात्य की अंधी नक़ल में अपनी ही संस्कृति की उपेश तो नहीं करने लगे हे पाश्चात्य को अपनाना बुरा नहीं हे ,बुरा हे अपनी जदो से कटना....कहते हे जब जागे तभी सबेरा.... आप सब से यही आशा हे की कम से कम अपने नवांकुरो को आज के दिन का महत्व बताते हुए आज के दिन को नए तरीके से मानाने के उपाय बतायेगे वेसे देश के अन्य हिस्सों जिसे महाराष्ट्र में आज का दिन गुड्डी पर्व तथा दक्षिण में उगादी के नाम से मनाया जाता हे....शुभ नव वर्ष आप सब को....
Thursday, March 31, 2011
ak sach
जीवन सहज और सरल नहीं होता अगर होता तो जीवन में इतनी परेशानियाँ नहीं होती....क्यों हर पल हमें अहसास दिला जाता हे कि कहीं तो हमारे जीवन में कुछ तो कमी है, उस कमी को हमें स्वयं दूर करना है....आखिर कब तक हम ऐसे ही हाथ पर हाथ धरे नहीं बेठे रहेंगे....अगर हमें अपनी मंजिल पानी हे तो पत्थरो को तोड़ कर राह बनानी ही होगी....शायद जीवन की यही खूबी हमें निरंतर प्रयास करने के लिए प्रेरित करती हे और हम बार बार असफलता के घूंट पीकर भी सफलता की कामना के साथ आगे बढ़ते जाते है....सही दिशा में आगे बढ़ने वाला कभी असफल नहीं होता, सच तो यह है प्रयास नहीं करने वाले ही भाग्य को दोष देते है , सबको काम करने के लिए दिन में २४ घंटे ही मिलते है कोई इनका उपयोग करके अमर हो जाता है तो कोई गन्दी नाली में पड़े कीड़े की मानिंद, बिना किसी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किए इस दुनिया से चला जाता है....अब तुम्हें स्वयं निर्धरित करना हे तुम्हे कौन सा जीवन चाहिए.....?
Friday, January 28, 2011
NIRASH HU ME
पिछले दो तीन दिन से मन बहुत परेशान हे, बचपन से हम सुनते आये हे कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक भारत एक हे कश्मीर भारत का अभिन अंग हे अगर ऐसा हे तो वहा एक आम हिन्दुस्तानी तिरंगा क्यूँ नहीं फहरा सकता....KAISI अजीब बात हे तिरंगा फहराने वालो को रोकने के लिए राज्य और केंद्र सरकार ने पूरी ताकत लगा दी....इसका क्या अर्थ निकाला जाये....क्या ऐसा करके हमने देश और दुनिया को यह सन्देश नहीं दिया की कश्मीर हमारे देश का हिस्सा नहीं हे....अगर यह सच हे तो हमारी सेना वहाँ क्या कर रही वह ऐसे देश की रक्षा में क्यों लगी हे जिसे हमारे देश के हुकुमरान अपना मानते ही नहीं हे....अगर ऐसा होता तो वह वहां तिरंगा फहराने जाने वालो को नहीं रोकते, रोकते भी तो उन्हें रोकते जो तिरंगा फहराने का विरोध कर रहे थे....इतिहास ऐसे नेत्रत्व को कभी माफ नहीं करेगा. उन्हें देश को जबाब देना ही होगा विशेषतया उन्हें जिनके पुत्र, पति या भाइयो ने देश के भाल की रक्षा करने में अपना सर्वस्य अर्पित कर दिया....वाह क्या श्रधांजलि दी हे हमने उन्हें....शर्म से हमे मर नहीं जाना CHAHIYE आज TO जय हिंद , जय भारत कहने में भी जबान लड़खड़ाने लगी हे.....
Saturday, January 8, 2011
hatash nirash
कई बार ऐसा होता है की न चाहते हुऐ भी इन्सान जिंदगी से हताश निराश हो जाता हे विभिन्न तरह के विचार आकर उसकी दशा और दिशा बदल देते हे पर वह कोई उपाय नहीं खोज पाता....स्तिथी इतनी अजब गजब हो जाती हे की वह उससे निकलने का सही मार्ग खोजने में असमर्थ रहता हे कुछ ऐसी ही स्तिथि हमारे देश की हे....राजनेताऔ ने अपने स्वार्थ के लिए समाज के इतने टुकड़े कर दिए हे की हमारी अस्मिता ही खतरे में पडा गई हे बचपन से हम सुनते आये हे की कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक भारत एक हे....दुःख होता हे जब कुछ तथागत बूधिजिवियो को भारत का अभिन्न अंग कहलाने वाले कश्मीर के बारे में कहते हुए सुनते हे की वह तो भारत का हिस्सा कभी था ही नहीं....लालचौक पर तिरंगा झंडा फहराने के जज्बे वालौ को आज चुनोती दी जाती की यदि आपके कारण घाटी में कोई समस्या आती हे तो उसके लिए आप ही जिम्मेवार होगे, वहां एक चुनी हुई सरकार हे, कानून व्यवस्था की जिम्मेवारी सरकार की हे, ऐसा कह कर वह देशभक्तों का साथ दे रही या अलगाववादियों का....समझ में यह नहीं आ रहा हे हमारी केंद्रीय सरकार यह सब देख सुन कर चुप क्यों हे....कही इसके पीछे कोई गहरी चाल तो नहीं हे....कही सरकार यह सब किसी के इशारे पर तो नहीं होने दे रही वरना ऐसा क्यों हे की हम अपने ही देश के एक भूभाग पर तिरंगा नहीं फहरा सकते न ही ऐसे लोगो पर कोई कार्यवाही कर पाते जो हमारे देश की अखंडता पर कुठाराघात करता हे....आखिर हम इतने विवश क्यों हे....हमारी सीमाओं पर हमरे वीर सपूत जान की बाजी लगा देते हे पर हम उनकी शहादत को मूल्य समझने को भी तेयार नहीं हे आखिर यह कैसी मजबूरी हे....न जाने कब हमारे राजनेता छुद्र स्वार्थ को तिलांजलि देकर देश हित में सोचेंगे और करेंगे....आज का हताश निराश सामान्य नागरिक गर्वे से एक बार पुनः कह सकेगा हम उस भारत देश के नागरिक हे जहाँ के हर नागरिक के दिल में देश के लिए अथाह प्रेम हे वह मर जायेगा पर अपने देश के टुकड़े नहीं होने देगा....
Saturday, December 18, 2010
हमारा मन या हमारी चाहत ही हमारे सारे दुखों का कारण है ...
हमारा मन या हमारी चाहत ही हमारे सारे दुखों का कारण है....सच तो यह है कि हम चाहे कितने भी साधन संपन्न क्यों न हों अगर हमारा मन संतुष्ट नहीं हे तो दुनिया के सारे सुख बेमानी है....यही कारण है कि कुटिया में रहने वाले,आधे पेट खाने वाले गरीब मजदूर भी चैन की नीद सोते है जबकि सब सुख-साधनों से भरपूर तथाकथित अमीर मखमली गद्दो पर भी करवट बदलते रहते है....क्यों....शायद इसलिए कि वे अपनी परिस्थितियो के साथ समझौता नहीं कर पाते...और अधिक पाने की चाह में निरंतर भौतिक सुखो की ओर भागते रहते है यही मनोवृति उनमें असंतुष्टि का कारण बनती है...। यह असंतुष्टि तभी दूर हो सकती है जब हम ऊपर यानि अपने से समर्थ को न देख कर नीचे अर्थात ग़रीबों को देखें....उनकी तकलीफों को महसूस करें....अभावों में भी उनकी हँसी का रहस्य जानने की कोशिश करें....पूर्ण विश्वास है की आप जीने की कला सीख जायेंगे ।
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