Thursday, December 8, 2016
आज नोट बंदी चर्चा का विषय बनी है ...
आज नोटबंदी चर्चा का विषय बनी है । यह सच है कि यह देश हित में लिया अभूतपूर्व फ़ैसला है पर आश्चर्य तो इस बात का है कि आम जनता से अधिक
हमारे विपक्षी दल परेशान हैं शायद उनकी रोज़ी रोटी पर कुठाराघात हुआ है तभी उन्होंने अपनी सारी क्षमता इस मिशन को फ़ेल करने में लगा दी है पर वे भूल गये
हैं आम नागरिक उनकी रग-रग से वाक़िफ़ है अत:वह उनकी अनर्गल बातें सुनने की अपेक्षा अपने प्रधानमंत्री को कुछ समय देना चाहती है ।
Monday, November 7, 2016
किसी भी परिस्थिति में आत्महत्या जायज़ नहीं
विपरीत परिस्थिति में आत्महत्या को जायज ठहराने वाले, उसका महिमा मंडन करने वाले शायद यह भूल जाते हैं कि आत्महत्या करना कायरता की निशानी है । उस पर दिल्ली सरकार का एक करोड़ देने का फ़ैसला...कहीं एेसा करके हम लोगों को उकसाने का काम तो नहीं कर रहे हैं । आख़िर परिवार के लिये समर्पित व्यक्ति अपने परिवार को सुरक्षित भविष्य देने के लिये इतना तो कर ही सकता है ।
Sunday, October 30, 2016
प्रत्येक वर्ष आता है दीप पर्व
प्रत्येक वर्ष आता है दीप पर्व
बुराई पर सच्चाई,
नफरत पर प्यार की
जीत का लेकर सन्देश ।
प्रत्येक वर्ष हम करते हैं प्रतिज्ञा
मन के अंधकार को मिटाने का
जन-जन के ह्रदय को ज्ञान के
दीप से आलोकित करने का ।
पर न स्वयं को बदल पाते हैं
न सामाजिक वातावरण को
इंसान हैं हम पाषाण नहीं
फिर विवशता क्यों और किसलिये ?
आओ एक कदम तुम बढ़ाओ
एक कदम मैं बढ़ाऊं
प्यार का एक दीप मैं जलाऊँ
एक दीप तुम जलाओ ।
सीमा पर सैनिक देते पहरा
समाज के प्रहरी बनो तुम
हर दिल में अपनत्व की रसधार बहे
एक मुकम्मल जहाँ ऐसा बनायें ।
शुभ दीपावली
@सुधा आदेश
Tuesday, October 18, 2016
है दीप शिखा
हूँ दीप शिखा
चौथ का चाँद
खेले आंखमिचौली
बेचैन नारी ।
दिखा चाँद
तन-मन हुलासा
तपस्या पूर्ण ।
अजब रीति
जली जिसके लिए
तोड़े स्वप्न ।
भग्न हृदय
जोड़ना सीखा मैंने
हारूँगी नहीं ।
चलूंगी संग
तू है मेरा, मैं तेरी
मेरा विश्वास ।
न ले परीक्षा
मोम की नहीं नारी
है दीपशिखा ।
@ सुधा आदेश
करवा चौथ की शुभकामनायें...
Tuesday, October 4, 2016
Saturday, October 1, 2016
1990 मे सयुक राष्ट्र की आम सभा मे 1 अक्तूबर को वृद्ध जन दिवस के रूप मे मनाने की घोषणा हुई थी। इसका उद्देश्य दुनिया भर के वृद्ध जनों की और दुनिया का ध्यान आकर्षित करना था तबसे इस दिन को वृद्ध जन दिवस के रूप मे मनाया जाता है पर लगता है यह दिन भी सिर्फ कागजों में सीमित होकर रह गया है अगर हम और उनके लिए कुछ नहीं कर सकते तो आज के संकल्प ही लें कि हम सदा अपने बुजुर्गो का आदर करेंगे,उनके मानसम्मान को कभी ठेस नहीं पहुंचायेंगे....मत भूलिए वृद्धावस्था अभिशाप नहीं वरदान है जीवन का,अनुभवो से गर सीख न सके निष्फल होगा जीवन अपना.....।
इसके साथ ही वृद्ध जनों को भी चाहिए कि वे अपने अनुभवों से भावी पीढ़ी को लाभान्वित करें न कि व्यर्थ टोका-टोकी कर निज संतानों का जीवन दुष्कर बनायें । जब तक वे समय के साथ स्वयं को नहीं बदलेंगे तब तक वह न स्वयं सुखी रह पायेंगे न ही अपने अंशों के साथ न्याय कर पाएंगे ।
स्वयं भी जियें और दूसरों को भी जीने दें का अगर सिद्धान्त अपना लें तो वृद्धावस्था बोझ नहीं वरन जीवन को जीने का एक नया आयाम सिद्ध होगी ।
Wednesday, September 14, 2016
हिन्दी दिवस
आज हिन्दी दिवस है...मुझे सदा आश्चर्य होता रहा है कि हमारी राष्ट्रभाषा के साथ राजभाषा भी हिन्दी है पर हर वर्ष इसके प्रचार और प्रसार के लिए हिन्दी दिवस मनाया जाता है क्यों...यह सच है शासक कोई भी रहा हो पर हिन्दी और हिन्दी साहित्य सदा से हमारे दिलों में राज करता रहा... हमने हिन्दी को इतना दीन-हीन बना दिया है कि प्रत्येक वर्ष हिन्दी दिवस और हिन्दी पखवाड़ा मनाकर हम अपने कर्तव्य की इतिश्री समझने लगते है...यह भी एक संयोग ही है कि यह पखवाड़ा अक्सर पितरपक्ष में ही आता है...इस संयोग से प्रेरित होकर एक कविता आपके सम्मुख पेश है....
मेरा बारह वर्षीय पुत्र
आकर बोला,
' ममा, कल हिन्दी दिवस है
मैडम ने कुछ लिखकर
लाने के लिए कहा है,
प्लीज ममा
कुछ लिखवा दो न...। '
मन में कुछ
अकुलाने लगा...
हिन्दी हमारी मात्रभाषा है,
राजभाषा है
और हम इसके
प्रचार और प्रसार हेतु
हिन्दी दिवस मना रहे है...
क्या धरोहर
दे रहे है नवांकुरों को
जिनकी जड़ें
हम नित्य विदेशी भाषा से
सींच रहे है ।
वर्ष में एक दिन
हिन्दी दिवस मनाकर
मात्रभाषा को
कब्र से खोदकर
खड़ा कर रहे है...
ठीक उसी तरह
जैसे पूर्वजों की
आत्मा की शांति के लिए
पितरपक्ष में एक दिन
उनके लिए सुरक्षित रख देते है,
उस दिन दान दक्षिणा देकर
उन्हें स्मरण कर
कर्तव्यों की
इतिश्री समझ कर
पुनः दिनचर्या में
हो जाते है लीन...।
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