क्लाइमेट चेंज का कौन है जिम्मेदार? स्वयं प्रकृति या फिर मानव?
आज मानव अपनी सुख -सुविधा के लिए प्रकृति से खिलवाड़ करने से नहीं चूक रहा है। अनियोजित शहरीकरण और औद्योगिक गतिविधियों के कारण जंगल कट रहे हैं, ऊँची -ऊँची अट्टालिकायें बन रही हैं। विकास के नाम पर यह न केवल शहरी क्षेत्रों में वरन गाँवों तथा पहाड़ी क्षेत्रों में भी हो रहा है। वनों की कटाई से कार्बन डाइऑक्साइड का संतुलन बिगड़ता है, क्योंकि पेड़ कार्बन सिंक के रूप में कार्य करते हैं और CO2 को अवशोषित करते हैं.
पेड़ों के कम होने के कारण पर्यावरण में ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का संतुलन बिगड़ता जा रहा है।
बिजली, परिवहन और उद्योगों में जीवाश्म ईंधन (कोयला, तेल, गैस) के निरंतर बढ़ते उपयोग से वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ने के कारण पूरे विश्व में तापमान में वृद्धि हो रही है। क्लाइमेट चेंज का यह महत्वपूर्ण कारक हो है।
क्लाइमेट चेंज समुद्र के स्तर में वृद्धि के साथ बाढ़, सूखा, तूफान इत्यादि के लिए जिम्मेदार है जिसके कारण पर्यावरण में इकोलॉजिकल परिवर्तन हो रहा है जो जान माल के नुकसान का कारण बन रहा है।
अगर इंसान ने अपनी जीवन शैली नहीं बदली, अनियंत्रित गति से ऐसे ही बढ़ता रहा तो वह दिन दूर नहीं ज़ब हमारी खूबसूरत धरा सिसकेगी इसका जिम्मेदार सिर्फ और हम इंसान ही होंगे।
सुधा आदेश
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