Wednesday, February 10, 2016

जे.एन.यू. में आतंकवादी

जे.एन.यू.में आतंकवादी अफ़ज़ल गुरू के समर्थन में भारत विरोधी नारे लगाये गये...समझ में नहीं आता यह कैसी मानसिकता है ? इस मानसिकता को कौन हवा दे रहा है क्या यह अभिव्यक्ति की आज़ादी का विकृत रूप नहीं है ? जिस देश का युवा देश विरोधी गतिविधियों में संलग्न हो वह विकास के पथ पर कैसे अग्रसर हो पायेगा ? सबसे बड़ा प्रश्न मेरे मन को मथ रहा है कि छात्रों का यह कृत्य राजद्रोह की श्रेणी में नहीं आयेगा ? आिखर अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर हम कब तक अराजक तत्वों की राष्ट्र विरोधी हरकतों को सहन करते रहेंगे ।

Wednesday, February 3, 2016

सफलता असफलता एक ही सिक्के के दो पहलू

सफलता असफलता एक ही सिक्के के दो पहलू जो असफलता से न घबड़ाये सफलता से न बौराये वही इतिहास बनाता है ।

Tuesday, February 2, 2016

जज़्बातों की दुनिया है अजीब, कभी हँसाते तो कभी रूलाते हैं जज़्बात ।

जज़्बातों की दुनिया है अजीब कभी हँसाते तो कभी रूलाते हैं जज़्बात । मन में कुछ और जुबां में कुछ और अच्छे-अच्छों को बेबकूफ बनाते हैं जज़्बात । खुदा ने दी नेमत इंसा को जज़्बातों की इंसा का देखो कैसे मख़ोल बनाते हैं जज़्बात । मत भूलो देख रहा है सारा ज़माना घडियाली मुखौटा उतरेगा, ओस नहीं हैं जज़्बात ।

Wednesday, January 27, 2016

अच्छे बुरे पलों का निचोड़ है ज़िंदगी ...

अच्छे बुरे पलों का निचोड़ है ज़िंदगी 
 संगीत नहीं , गणित सी कठोर है ज़िंदगी । 

 पल कभी टीस देते हैं,कभी देते हैं ख़ुशी 
 घबराना नहीं, बौराना नहीं, निचोड़ है ज़िंदगी। 

 सहेजना उन्हीं पलों को जो देते हैं ख़ुशी 
रजनीगंधा सी महकती जायेगी ज़िंदगी ।

 ख़ुशियों को बाँटो हर पल को जिओ 
रूको न कभी,खुदा की इनायत है ज़िंदगी । 

 ज़िंदगी का फ़लसफ़ा गर समझ पाये दोस्त
  बेगानी नहीं,अपनी सी,इंद्रधनुषी लगेगी ज़िंदगी ।

Monday, January 25, 2016

सुर से सुर मिलायें ...

आओ नमन करें जिन्होंने संविधान बनाया था, सर्व धर्म समभाव सिखाकर पाठ रहना सिखाया था । गांधी नेहरू को हम भूल चुके,सुभाष भी अब याद नहीं, मुँह में राम बग़ल में छुरी, यह तो हमारी संस्कृति नहीं । गौतम बुद्ध , महावीर की कर्मस्थली में गौडसे कभी आदर्श बन नहीं सकता । छिप कर करे जो वार वह कायर है स्वतंत्रता सेनानी है या जेहादी समझना होगा । टुकड़ों -टुकड़ों में बँटकर कोई जी नहीं पाया हम पंक्षी है एक डाल के, समझना होगा । ख़ून चाहे हिंदू का बहे या मुसिलम सिख ईसाई का जिस्म एक है, दर्द सबको होगा । एक साथ एक समाज में रहकर भी साथ न रह पाये, दोष हमारा होगा । नारे भले लगा लें एकता के स्वार्थ गर मन में , भला नहीं किसी का होगा । टुकड़ों -टुकड़ों में बँटा मानव न सिर्फ़ समाज का अपना भी अहित करेगा । बैर भाव त्याग , शत्रु को भी गले लगायें, सुर से सुर मिलायें, चलो आज नया भारत बनायें ।

Saturday, January 23, 2016

आज मोदी सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्मदिन पर उनसे संबंधित १०० फ़ाइलें सार्वजनिक की हैं

आज मोदी सरकार द्वारा नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्मदिन पर उनसे संबंधित १०० फ़ाइलें सार्वजनिक की हैं । पूरा देश सच जानने के लिये उत्सुक है पर केवल सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस न जाने क्यों इन फाइलों के सार्वजनिक होने से प्रसन्न नहीं है । उसके प्रवक्ताओं का न्यूज़ चैनल पर बर्ताव देखकर जाने अंनजाने मन में यही आ रहा है कि कहीं न कहीं दाल में काला अवश्य है ।

Wednesday, January 20, 2016

कभी-कभी मन जब बेहद दुखी हो जाता है ...

कभी-कभी जब मन बेहद दुखी हो जाता है तब भावशूनयता की स्थिति उत्पन्न हो जाती है । आख़िर कोई व्यक्ति इतना नृशंस कैसे हो जाता है कि दूसरों का ख़ून बहाकर उसे सुकून मिलता है । माना जो व्यक्ति इन नरसंहार में उनकी बंदूक़ों का शिकार होता है उससे उनका कोई संबंध नहीं होता पर इंसानियत का संबंध तो होता है फिर उनकी चीख़ पुकार क्यों नहीं सुनाई देती ? भगवान / अल्लाह ने इंसान को धरती पर नेक कार्य करने भेजा है फिर यह नरसंहार क्यों ?