Tuesday, March 19, 2019

लोन माफ़ी का शोर मचा है

लोन माफ़ी का शोर मचा है मुफ़्त खाने का रोग लगा है मेहनत मज़दूरी क्यों करें सरकार ने हमारा ठेका लिया है । कोई मेहनत करे, कोई ऐश करे ज़माने का शग़ल समझ में आता नहीं, तरक़्क़ी कैसे करेगा यह देश जब अपाहिजों की क़तार लगी । अभी न संभले तो कभी न संभलेंगे दूसरों पर क्यों,स्वयं पर करो यक़ीं मेहनत करेंगे हाथ,किस्मत अवश्य बदलेगी मानो न मानो लाख टके की है बात ।

प्रियंका बढेरा गांधी कहती हैं कि अमीर लोग चौकीदार रखते हैं ...

प्रियंका वाड्रा गांधी कहती हैं कि अमीर लोग चौकीदार रखते हैं... सही बात । अमीरों को अपनी संपत्ति तथा जानमाल की रक्षार्थ चौकीदार रखना पड़ता है जबकि गरीब स्वयं ही मालिक है तथा चौकीदार भी । उसे अपने घर, अपने बच्चों की चौकीदारी स्वयं ही करनी पड़ती है । व्यक्ति की बात छोड़िये, हमारी संवैधानिक संस्थाओं की स्थापना की मूल भावना भी तो व्यक्ति के,समाज के अधिकारों की रक्षार्थ की गई हैं । व्यापक अर्थ में देखें तो वे समाज के चौकीदार हुए न । अगर हम सब वास्तव में चौकीदार बन जाएं तो काफी हद तक देश में फैली बुराइयां...भ्रष्टाचार, अनाचार का समूल नाश हो जाएगा । बस अपना-अपना किरदार ढंग से निभाना होगा । घर में भी घर के सभी सदस्य थोड़ी-थोड़ी जिम्मेदारी उठायें तो काम सुव्यवस्थित ढंग से हो पाता है । इतने बड़े देश को कोई एक स्वच्छ एवं सुव्यवस्थित नहीं रख सकता । हम सभी प्रयास करें देश को बदलते देर नहीं लगेगी ।

Saturday, February 23, 2019

बेहद दुखी हैं हम...

अवंतिपुरा में सी.आर. पी.एफ.जवानों पर आतंकी हमला...26 जवान शहीद । देश का बड़ा नुकसान । पक्ष विपक्ष के बयान यह सोचने को विवश करते हैं कि क्या हो गया है नेताओं को ? क्या दुख की घड़ी में भी वे एकमत नहीं हो सकते ? सेना को सशक्त क्यों नहीं करते ? उनके लिये खरीदे जाने वाले विमान, तोपे, जीपें सदा संदेह और बहस का मुद्दा क्यों बन जाते हैं ? भारत चीन युद्ध के समय देशवासियों ने सेना की धन से कपडों से मदद की थी ,अब भी कमोवेश यही स्तिथि है । लोग अन्य जगह भ्रष्टाचार की दुहाई नहीं देंगे लेकिन जब सेना को मजबूत बनाने के लिये कोई डील होती है वह संदेह के घेरे में आ जाती है । जिन्हें देश से प्यार है वे ऐसा कर ही नहीं सकते ... देश के लिये, हमारे लिये शहीद होने वाले जवानों को शत-शत नमन । मत भूलिए देश है तो हम हैं जो देश को प्यार नहीं करता उसे इस देश में रहने का अधिकार नहीं है ।

Monday, September 10, 2018

SUDHA ADESH: कमज़ोर नहीं हैं बेटियाँ

SUDHA ADESH: कमज़ोर नहीं हैं बेटियाँ: हमारी बेटियाँ कमज़ोर नहीं हैं बेटियाँ कमज़ोर बनाते हैं हम उन्हें यह न करो, वह न करो के बंधनों में बाँधकर । लड़कों को तो नहीं टोकते,रोकते ...

कमज़ोर नहीं हैं बेटियाँ

हमारी बेटियाँ कमज़ोर नहीं हैं बेटियाँ कमज़ोर बनाते हैं हम उन्हें यह न करो, वह न करो के बंधनों में बाँधकर । लड़कों को तो नहीं टोकते,रोकते लड़के हैं ग़लती हो गई, कर देते हैं सारे गुनाह माफ़... काश !लडकियों से भी यही कह पाते । शरीर को शरीर ही रहने देते पवित्रता ,अपवित्रता से न जोड़ते, चिड़िया सा चहचहाने,कोयल सा गुनगुनाने देते, तब हमारी बेटियाँ कमज़ोर न होतीं । सृष्टि की जन्मदातरी,सहनशीलता समाई जिसकी रग-रग में ,कमज़ोर हो नहीं सकती , हमें बदलना होगा,बेटियों के प्रति नज़रिये को जब नर अपवित्र नहीं तो नारी क्यों ? सोच बदल पाये गर समाज की हम दुष्कर्म नारी के लिये कलंक नहीं, यातना नहीं ,बोझ नहीं, अभिशाप नहीं, सिरफ हादसा होगा, सिर्फ़ एक हादसा । @सुधा आदेश

Wednesday, September 5, 2018

आज शिक्षक दिवस है...उन सभी शिक्षकों जो ज्ञान का प्रकाश फैलने की चेष्टा में सतत प्रयत्नशील है उनको शत-शत नमन...कुछ शब्द उनके और समाज के लिये... शिक्षा का कोई अंत नहीं, उम्र का कोई बंधन नहीं, समय की बाध्यता नहीं... जन्म से लेकर मृत्यु तक मानव कुछ न कुछ सीखता ही रहता है कभी प्रकृति से तो कभी आस-पास के परिवेश से... शिक्षा ऐसा लेन देन है जिससे लेने वाले की झोली तो भरती ही है, देने वाला भी कभी नहीं रीतता... सच तो यह है जो इस महादान को देने और लेने में कंजूसी करता है, वही अंततः रीतता जाता है । @सुधा आदेश

Monday, September 3, 2018

नाग नथैया, कृष्ण कन्हैया

नाग नथैया, कृष्ण कन्हैया, गाय चरइया, रास रचिया, कर मुरली साजे, पग पैजनियां बाजे अब तो आओ दरस दिखाओ छिपे कहाँ मुरलीधर प्यारे राह देखे सारा जमाना... घट-घट छाई घटा मतवाली, रिमझिम बरस रही बरखा प्यारी, मुरली की धुन को तरसें सखियां सारी, अब तो आओ, दरस दिखाओ... छिपे कहाँ मुरलीधर प्यारे राह देखें चितचोर तुम्हारी... चहुँ ओर छाया घना अंधेरा पग-पग पसरे अजगर चाहें डसना अब तो है बस तेरा ही सहारा अब तो आओ दरस दिखाओ छिपे कहाँ मुरलीधर प्यारे राह तकती अखियाँ हमारी ... दिया था तुमने प्यार का संदेश, लूट खसोट बना जमाने का चलन, ईमानदारी का नहीं नामोनिशान, अब तो आओ दरस दिखाओ छिपे कहाँ मुरलीधर प्यारे जन-जन की टूटी आस बंधी तुमसे... जन्माष्टमी की अनेकानेक शुभकामनाएं... @सुधा आदेश