Tuesday, October 18, 2016

है दीप शिखा

हूँ दीप शिखा चौथ का चाँद खेले आंखमिचौली बेचैन नारी । दिखा चाँद तन-मन हुलासा तपस्या पूर्ण । अजब रीति जली जिसके लिए तोड़े स्वप्न । भग्न हृदय जोड़ना सीखा मैंने हारूँगी नहीं । चलूंगी संग तू है मेरा, मैं तेरी मेरा विश्वास । न ले परीक्षा मोम की नहीं नारी है दीपशिखा । @ सुधा आदेश करवा चौथ की शुभकामनायें...

Tuesday, October 4, 2016

जिस देश के नेताओं की रगों में सिर्फ़ सियासत है, सोच विकृत हो वहाँ इस तरह के आरोप लगेंगे ही । अब तो यही लगता है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता इस देश को ले डूबेगी !!अगर केजरीवाल , संजय निरूपम जैसे नेताओं की नकेल कस दी जाये तो पाकिस्तान विश्व के नक़्शे से स्वयमेव ही मिट जायेगा ।

Saturday, October 1, 2016

1990 मे सयुक राष्ट्र की आम सभा मे 1 अक्तूबर को वृद्ध जन दिवस के रूप मे मनाने की घोषणा हुई थी। इसका उद्देश्य दुनिया भर के वृद्ध जनों की और दुनिया का ध्यान आकर्षित करना था तबसे इस दिन को वृद्ध जन दिवस के रूप मे मनाया जाता है पर लगता है यह दिन भी सिर्फ कागजों में सीमित होकर रह गया है अगर हम और उनके लिए कुछ नहीं कर सकते तो आज के संकल्प ही लें कि हम सदा अपने बुजुर्गो का आदर करेंगे,उनके मानसम्मान को कभी ठेस नहीं पहुंचायेंगे....मत भूलिए वृद्धावस्था अभिशाप नहीं वरदान है जीवन का,अनुभवो से गर सीख न सके निष्फल होगा जीवन अपना.....। इसके साथ ही वृद्ध जनों को भी चाहिए कि वे अपने अनुभवों से भावी पीढ़ी को लाभान्वित करें न कि व्यर्थ टोका-टोकी कर निज संतानों का जीवन दुष्कर बनायें । जब तक वे समय के साथ स्वयं को नहीं बदलेंगे तब तक वह न स्वयं सुखी रह पायेंगे न ही अपने अंशों के साथ न्याय कर पाएंगे । स्वयं भी जियें और दूसरों को भी जीने दें का अगर सिद्धान्त अपना लें तो वृद्धावस्था बोझ नहीं वरन जीवन को जीने का एक नया आयाम सिद्ध होगी ।

Wednesday, September 14, 2016

हिन्दी दिवस

आज हिन्दी दिवस है...मुझे सदा आश्चर्य होता रहा है कि हमारी राष्ट्रभाषा के साथ राजभाषा भी हिन्दी है पर हर वर्ष इसके प्रचार और प्रसार के लिए हिन्दी दिवस मनाया जाता है क्यों...यह सच है शासक कोई भी रहा हो पर हिन्दी और हिन्दी साहित्य सदा से हमारे दिलों में राज करता रहा... हमने हिन्दी को इतना दीन-हीन बना दिया है कि प्रत्येक वर्ष हिन्दी दिवस और हिन्दी पखवाड़ा मनाकर हम अपने कर्तव्य की इतिश्री समझने लगते है...यह भी एक संयोग ही है कि यह पखवाड़ा अक्सर पितरपक्ष में ही आता है...इस संयोग से प्रेरित होकर एक कविता आपके सम्मुख पेश है.... मेरा बारह वर्षीय पुत्र आकर बोला, ' ममा, कल हिन्दी दिवस है मैडम ने कुछ लिखकर लाने के लिए कहा है, प्लीज ममा कुछ लिखवा दो न...। ' मन में कुछ अकुलाने लगा... हिन्दी हमारी मात्रभाषा है, राजभाषा है और हम इसके प्रचार और प्रसार हेतु हिन्दी दिवस मना रहे है... क्या धरोहर दे रहे है नवांकुरों को जिनकी जड़ें हम नित्य विदेशी भाषा से सींच रहे है । वर्ष में एक दिन हिन्दी दिवस मनाकर मात्रभाषा को कब्र से खोदकर खड़ा कर रहे है... ठीक उसी तरह जैसे पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पितरपक्ष में एक दिन उनके लिए सुरक्षित रख देते है, उस दिन दान दक्षिणा देकर उन्हें स्मरण कर कर्तव्यों की इतिश्री समझ कर पुनः दिनचर्या में हो जाते है लीन...।

Friday, September 9, 2016

सासू माँ को विनम्र श्रद्धांजलि ...

मेरी सासू माँ... आज उनको गये हुए 15 दिन हो गए पर मन है कि वस्तुस्तिथि को स्वीकार ही नहीं कर पा रहा है । लगता है वे कहीं छिप गई हैं, थोड़ी देर में आ जायेगी । काश यह संभव हो पाता ... जिंदगी को चलना है वह तो चलेगी ही पर इतना विश्वास है कि यादों के रूप में सदा हमारे आस पास रहेंगी । मैंने अपना कहानी संग्रह आत्ममंथन उन्हें समर्पित किया था, इन शब्दों द्वारा उन्हें हमारी श्रद्धांजलि अर्पित है ... समर्पित उनको जो जन्म की नहीं कर्म की माँ बनी । संस्कारों की धरोहर सहेजे कर्मपथ पर लीन स्वयं भी चलीं हमें भी प्रेरित किया । आशीर्वचनों के साथ वरदहस्त सदा रहे दिल में बस यही कामना । शत-शत अभिनन्दन माँ तुमको सदा सर्वदा अटूट यही हमारी भावना । सुधा आदेश

Monday, August 15, 2016

आज स्वतंत्रता दिवस है हमारी आज़ादी का पर्व

आज स्वतंत्रता दिवस है हमारी आज़ादी का पर्व ... मना लो आज़ादी का जश्न अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर सार्थक या निरर्थक बहस कितनी भी क्यों न कर लो, पर मत भूलना क़ुरबानी शहीदों की तुम्हारे लिये जिन्होंने गोली सीने पर खाई पीठ पर नहीं । ये देश सिर्फ़ उनका ही नहीं तुम्हारा भी है... वे सीमा के प्रहरी हैं तुम देश के चप्पे के प्रहरी बनो ... भूख, ग़रीबी,भ्रष्टाचार , अनाचार के विरूद्ध आवाज़ ही न उठाओ दूर करने का प्रयास भी करो ... तभी हम एक अखंड ख़ुशहाल भारत का स्वप्न पूरा कर पायेंगे । जय भारत, जय हिन्द ... स्वतंत्रता दिवस की अनेकानेक बधाइयाँ @ सुधा आदेश

Wednesday, August 3, 2016

पल बुरे नहीं होते, गर पलों को जीने का लुफ़्त सीख पाते ...

पल बुरे नहीं होते गर पलों को 
जीने का लुफ़्त सीख पाते । 

 माना पलों ने बिगाड़ी हैं सैकड़ों ज़िंदगियों 
 वही पल सँवार भी गया है बिगड़ी ज़िंदगियाँ । 

 हर पल तुम्हारा, नियंता तुम निज ज़िंदगी के 
फिर आक्रोश क्यों, विरक्ति क्यों ? 

 ज़रा सोचो, ज़रा समझो, आगे क़दम बढ़ाओ 
हर पल को क़ैद कर मुट्ठी में नया इतिहास रचाओ ।