Thursday, July 30, 2026

 क्लाइमेट चेंज का कौन है जिम्मेदार? स्वयं प्रकृति या फिर मानव?


आज मानव अपनी सुख -सुविधा के लिए प्रकृति से खिलवाड़ करने से नहीं चूक रहा है। अनियोजित शहरीकरण और औद्योगिक गतिविधियों के कारण जंगल कट रहे हैं, ऊँची -ऊँची अट्टालिकायें बन रही हैं। विकास के नाम पर यह न केवल शहरी क्षेत्रों में वरन गाँवों तथा पहाड़ी क्षेत्रों में भी हो रहा है। वनों की कटाई से कार्बन डाइऑक्साइड का संतुलन बिगड़ता है, क्योंकि पेड़ कार्बन सिंक के रूप में कार्य करते हैं और CO2 को अवशोषित करते हैं. 

पेड़ों के कम होने के कारण पर्यावरण में ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का संतुलन बिगड़ता जा रहा है।


 बिजली, परिवहन और उद्योगों में जीवाश्म ईंधन (कोयला, तेल, गैस) के निरंतर बढ़ते उपयोग से वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ने के कारण पूरे विश्व में तापमान में वृद्धि हो रही है। क्लाइमेट चेंज का यह महत्वपूर्ण कारक हो है।


क्लाइमेट चेंज समुद्र के स्तर में वृद्धि के साथ बाढ़, सूखा, तूफान इत्यादि के लिए जिम्मेदार है जिसके कारण पर्यावरण में इकोलॉजिकल परिवर्तन हो रहा है जो जान माल के नुकसान का कारण बन रहा है।


अगर इंसान ने अपनी जीवन शैली नहीं बदली, अनियंत्रित गति से ऐसे ही बढ़ता रहा तो वह दिन दूर नहीं ज़ब हमारी खूबसूरत धरा सिसकेगी इसका जिम्मेदार सिर्फ और हम इंसान ही होंगे।


सुधा आदेश 


Monday, July 27, 2026

पेपर लीक की समस्या का समाधान हो पायेगा.

 पेपर लीक  सिर्फ भारत की नहीं वरन वैश्विक समस्या है।  कुछ दिन पहले लंदन में भी पेपर लीक हुआ था। बस अंतर इतना है कि वहां आरोपियों पर तुरंत कार्यवाही हो जाती है लेकिन हमारे देश कि लचर क़ानून व्यवस्था के कारण आरोपियों को सजा नहीं मिल पाती 

सच हमारा समाज नैतिक रूप से इतना गिर गया है कि उसे अपने स्वार्थ ए अतिरिक्त कुछ नजर नहीं आता। अपने हित के लिए वह अपने देश और समाज का ही अहित करने में पीछे नहीं रहता। यहाँ तो पेपर बनाने वाले ने ही पेपर लीक कर दिया। 

लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी के द्वारा किया आंदोलन पेपर लीक पर कम अपने स्वार्थ के लिए अधिक था, ऐसा मुझे लगता है। जब नीट की परीक्षा दुबारा हो गई, सफल अभ्यर्थी एडमिशन लेने की तैयारी कर रहे हैं तब इस आंदोलन का क्या औचित्य? हाँ अगर ये इस बात पर आंदोलन करते कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले, जिससे यह गलती दुबारा न हो तो बात समझ में भी आती है या फिर उस न्याय व्यवस्था  के विरुद्ध करते जहाँ डेट पर डेट लगती जाती हैं किन्तु न्याय नहीं मिल पाता या उन वकीलों के विरुद्ध करते जो पैसों के लिए केस को दुर्बल कर देते हैं या आतंकियों के लिए रात में भी कोर्ट खुलवा लेते हैं। इसके साथ आश्चर्यजनक बात तो यह रही कि इस मंच से देश विरोधी नारे भी लगे।

माना पेपर लीक बहुत बड़ी समस्या है लेकिन क्या सिर्फ लीक करने वाला दोषी है? क्या वे दोषी नहीं हैं जो अपने नालायक बच्चों को योग्य बनाने के लिए  येन केन प्रकारेण किसी हद तक भी जा सकते हैं।

बच्चों को योग्य बनाना, उसके सुखी एवं समृद्ध जीवन की कामना हर इंसान करता है किन्तु जिसके जीवन की नींव ही झूठ और फरेब पर बनी होगी वह भविष्य में कैसा होगा उसकी कल्पना ही की जा सकती है।

मेरा मानना है कि जो लक्ष्य के प्रति समर्पित रहता है, उसे सिर्फ अपना लक्ष्य ही दिखाई देता है। इस आंदोलन का वही हिस्सा बने जिन्हें पढ़ाई से कोई मतलब नहीं है, वरना इनके मुँह से इतनी अश्लील बातें…